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मौसम आधारित फसल बीमा की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए शिवमोग्गा सांसद
शिवमोग्गा के सांसद ने सुपारी उत्पादकों को मिलने वाले न्यून मुआवजे के मद्देनजर मौसम आधारित फसल बीमा योजना की कार्यकारिता पर सवाल उठाए हैं। सांसद ने इस बात की चिंता व्यक्त की है कि योजना कृषकों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर रही है।
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शिवमोग्गा के सांसद ने कृषि मंत्रालय को ध्यान में लाते हुए कहा है कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना की मौजूदा संरचना में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। विशेष रूप से सुपारी उगाने वाले किसानों की शिकायतें सामने आई हैं कि उन्हें फसल खराब होने के बाद योजना के तहत बहुत कम मुआवजा मिल रहा है।
सांसद के अनुसार, सूखे और अन्य प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के दौरान सुपारी की पैदावार में भारी गिरावट आई है, लेकिन बीमा कंपनियां न्यूनतम मुआवजे का भुगतान कर रही हैं। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान की भरपाई नहीं हो रही है और वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
यह मामला इस बात को उजागर करता है कि बीमा योजनाओं को तैयार करते समय स्थानीय फसलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं दिया गया है। सांसद ने मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक व्यापक समीक्षा करें और योजना के मानदंडों को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप संशोधित करें।
कृषि अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि मौसम आधारित बीमा निर्धारित मानदंडों पर आधारित होने के कारण अक्सर वास्तविक क्षति का सही आकलन नहीं कर पाता है। इसके बदले में वे सुझाव देते हैं कि प्रत्यक्ष नुकसान मूल्यांकन और अधिक लचीली योजनाएं किसानों के लिए अधिक कारगर साबित हो सकती हैं।