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पश्चिम बंगाल में छह महीने में 60,000 नाबालिग प्रसव, सरकार सख्त कार्रवाई करेगी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 2026 की पहली छमाही में संस्थागत प्रसव के दौरान 60,000 नाबालिग महिलाओं का पंजीकरण दर्ज हुआ। सरकार बाल विवाह के मामलों में गिरफ्तारी और सामाजिक सुविधाएं रोकने का संकल्प दिया है।
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पश्चिम बंगाल में नाबालिग विवाह और प्रसव की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राज्य के मुख्यमंत्री ने सोमवार को संसद में स्वीकार किया कि इस वर्ष की पहली छमाही में सरकारी और निजी अस्पतालों में 60,000 नाबालिग महिलाओं का प्रसव दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा बाल विवाह की समस्या की गंभीरता को उजागर करता है।
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार कठोर कदम उठाने का फैसला किया है। सरकार ने घोषणा की है कि बाल विवाह के मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। इसके अलावा, ऐसे परिवारों को राज्य और केंद्रीय सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देना बंद किया जाएगा।
इस फैसले का उद्देश्य माता-पिता और अभिभावकों को बाल विवाह से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है। राज्य सरकार का मानना है कि सामाजिक सहायता और वित्तीय लाभ रोकने से परिवार नाबालिग लड़कियों की शादी करने से पहले दो बार सोचेंगे। सरकार इस दिशा में जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित कर रही है।
पश्चिम बंगाल में बाल विवाह की समस्या शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर गंभीर असर डाल रही है। नाबालिग प्रसव से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में वृद्धि देखी जा रही है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग और महिला कल्याण विभाग समन्वय से समस्या के समाधान में जुटे हैं।