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पश्चिम बंगाल के गांव में महालया से ही पूरी होती है दुर्गा पूजा
आसनसोल के धेनुआ गांव में दुर्गा पूजा की परंपरा निराली है। यहां महालया के दिन ही सप्तमी से विसर्जन तक के सभी प्रमुख अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
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पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिले स्थित धेनुआ गांव में दुर्गा पूजा की एक अद्भुत परंपरा सदियों से चली आ रही है। दामोदर नदी के किनारे स्थित कालीकृष्ण आश्रम में महालया के दिन ही सप्तमी, अष्टमी, नवमी और विसर्जन जैसे प्रमुख अनुष्ठान एक साथ पूरे किए जाते हैं।
इस गांव की परंपरा में माता दुर्गा की प्रतिमा की पूजा के दौरान गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाएं नहीं रखी जाती हैं। इसकी जगह देवी की सखियों जया और विजया की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, जो इस परंपरा को अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती हैं।
आश्रम में यह अनूठी परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है और स्थानीय समुदाय इसे धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानता है। महालया के दिन ही पूरे दुर्गा पूजा चक्र को संपन्न करने की प्रथा इस क्षेत्र की विशिष्ट पहचान बन गई है।