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पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर से यातायात समय में 60% की कटौती संभव
भारतीय रेलवे के पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर परियोजना को पूर्ण रूप से संचालित किया जा रहा है, जिससे कंटेनर परिवहन में क्रांतिकारी सुधार की संभावना है। कंटेनर संचालकों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पूर्ण क्षमता को उजागर करने के लिए रेलवे सुधारों की मांग की है।
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भारत का पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर अब अपनी पूरी लंबाई तक संचालित हो गया है, जो माल ढुलाई क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास है। इस परियोजना से कंटेनर परिवहन में पारगमन समय में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है, जो घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दोनों को गति देगी।
कंटेनर संचालकों की ओर से आई प्रतিक्रिया में कहा गया है कि इस नई सुविधा की पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए रेलवे क्षेत्र में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन की दक्षता में सुधार, बेहतर समन्वय और नियामक ढांचे को सुव्यवस्थित करने से परिवहन लागत में और भी अधिक कमी संभव है।
यह कॉरिडोर भारत की बुनियादी ढांचा विकास योजना का एक प्रमुख घटक है, जो क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि सभी सुधार आवश्यकताएं पूरी की जाएं, तो यह कॉरिडोर भारत के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को पुनर्निर्धारित कर सकता है।
रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि वे परिवहन क्षेत्र की प्रतिक्रिया सुनने के लिए तैयार हैं और आने वाले महीनों में हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श करेंगे। इस सहयोगी दृष्टिकोण से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपेक्षा की जा रही है।