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पश्चिमी घाट में आपदाएं पर्यावरण विनाश की चेतावनी: पटकर
कार्यकर्ता मेधा पटकर ने पश्चिमी घाट में बड़ी परियोजनाओं के विरुद्ध आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आने वाली आपदाएं पर्यावरणीय विनाश का संकेत हैं।
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पर्यावरण कार्यकर्ता मेधा पटकर ने पश्चिमी घाट में बढ़ती आपदाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, इस संवेदनशील क्षेत्र में आने वाली प्राकृतिक आपदाएं मानवीय हस्तक्षेप और अनियोजित विकास के सीधे परिणाम हैं।
पटकर ने महादायी नदी बेसिन परियोजना जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं की आलोचना की है। उनका तर्क है कि इस तरह की परियोजनाएं पश्चिमी घाट के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है और वैश्विक महत्व के लिए मान्यता प्राप्त है।
कार्यकर्ता का मानना है कि बड़े बांध और अवसंरचना परियोजनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को बढ़ाती हैं और बाढ़ व भूस्खलन जैसी आपदाओं का कारण बनती हैं। पटकर ने सुझाव दिया है कि पश्चिमी घाट में किसी भी विकास कार्य के लिए कठोर पर्यावरणीय मानदंड लागू किए जाने चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी को संरक्षित नहीं किया गया, तो भविष्य में अधिक विनाशकारी आपदाएं आ सकती हैं। पटकर का अनुरोध है कि नीति निर्माता और प्रशासन स्थानीय समुदायों की आवाजें सुनें और विकास परियोजनाओं पर पुनर्विचार करें।