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पल्लिकरणै दलदल: निर्माण कंपनियों के हित में बफर जोन घटाया गया, आरोप
अनुभवी राजनेता का सवाल है कि आर्द्रभूमि प्राधिकरण सरकार के प्रति जवाबदेह है या निर्माण कंपनियों के प्रति। उन्होंने तमिलनाडु भर में सभी आर्द्रभूमि को अधिसूचित करने की मांग की है।
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तमिलनाडु में चेन्नई के निकट स्थित पल्लिकरणै दलदल को लेकर विवाद छिड़ गया है। सरकार पर आरोप है कि उसने निर्माण कंपनियों के हित में इस महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के चारों ओर सुरक्षा क्षेत्र को तेजी से घटा दिया है।
इस मामले में राजनीतिक हलकों में सवाल उठाए जा रहे हैं कि आर्द्रभूमि प्राधिकरण का प्रमुख लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण है या निर्माण व्यवसाय की सुविधा। विरोधी पक्ष का कहना है कि प्राधिकरण ने बफर जोन में कमी को मंजूरी देते समय असाधारण तेजी दिखाई है, जबकि पर्यावरण संबंधी प्रस्तावों पर वही गति नहीं रहती।
पल्लिकरणै दलदल तमिलनाडु की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि में से एक है, जो स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके आस-पास के विकास पर अंकुश लगाने के लिए बफर जोन का निर्धारण किया गया था।
इस मामले पर सरकार से पारदर्शिता बरतने और पूरे राज्य में सभी आर्द्रभूमि को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने की मांग की जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्द्रभूमि संरक्षण के मामले में सरकार को जवाबदेही और स्पष्टता के साथ काम करना चाहिए।