World · India Bureau
नवरात्र समाप्ति के बाद कलश और पूजा सामग्री: परंपरागत तरीके जानें
शरदीय नवरात्र के दौरान घरों में रखे कलश, अखंड ज्योत और पूजा सामग्री का सही तरीके से निस्तारण करना चाहिए। परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार इन वस्तुओं को संभालने का विशेष महत्व माना जाता है।
LSN India ·

नवरात्र का पर्व समाप्त होने के बाद घरों में उपयोग किए गए कलश, दीप और अन्य पूजा सामग्री को लेकर कई लोगों के मन में संशय रहता है। परंपरागत विधि के अनुसार इन वस्तुओं को किसी भी तरह से अपमानित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ये सभी देवी पूजन के दौरान पवित्र मानी जाती हैं।
नवरात्र के दौरान रखे गए कलश को दसवें दिन यानी विजयदशमी के अगले दिन घर में ही सावधानीपूर्वक रख देना चाहिए। कई घरों में परंपरा है कि इसे बगीचे के किसी शांत और पवित्र स्थान पर मिट्टी में दबा दिया जाता है। अखंड ज्योत को भी पूरे नवरात्र अवधि तक जलाया जाता है और इसके बाद इसे धीरे-धीरे बुझाया जाता है।
दादी-नानी के समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री जैसे नारियल, जौ और अन्य सामग्रियों को प्रसाद के रूप में परिवार और पड़ोसियों में बांटा जाता था। इस तरह पवित्र वस्तुओं का सम्मान बनाए रखते हुए उनका उपयोग किया जाता था। यह परंपरा न केवल धार्मिक मान्यताओं को दर्शाती है बल्कि सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करती है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार कलश को किसी भी सूरत में कूड़े में नहीं फेंका जाना चाहिए। इसे सम्मान के साथ रखना चाहिए ताकि परिवार की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। कई परिवार इन वस्तुओं को अगले नवरात्र तक सुरक्षित रख लेते हैं।