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प्रीमियम होटलों के खारिज तौलियों का दूसरा जीवन: रीसाइक्लिंग का सफर
विलासवान होटलों में उपयोग किए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले तौलिये जब खराब हो जाते हैं तो उन्हें सीधे कूड़े में नहीं फेंका जाता। ये वस्त्र एक व्यवस्थित रीसाइक्लिंग प्रक्रिया से गुजरते हैं जहां उन्हें विभिन्न नए रूपों में परिवर्तित किया जाता है।
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भारत के प्रमुख होटल श्रृंखलाएं पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ अपने खारिज किए गए कपड़ों का प्रबंधन करती हैं। तौलिये जैसी वस्तुएं, जो अपनी सेवा अवधि पूरी कर लेती हैं, सीधे कूड़े में न जाकर विशेष रीसाइक्लिंग केंद्रों में भेजी जाती हैं।
इन केंद्रों में आने वाले तौलियों को पहले छांटा जाता है। जो तौलिये अभी भी उपयोग के लायक होते हैं, उन्हें साफ किया जाता है और दान के लिए तैयार किया जाता है। शेष तौलियों को कच्चे माल के रूप में नई प्रक्रिया में भेजा जाता है।
रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में इन तौलियों के कपड़े को विघटित किया जाता है और उन्हें विभिन्न उत्पादों में रूपांतरित किया जाता है। इनमें सफाई के कपड़े, पोंछे, औद्योगिक कपड़े और यहां तक कि निर्माण सामग्री शामिल हो सकती है। कुछ तौलिए के रेशों का उपयोग इंसुलेशन सामग्री या पालतू जानवरों की बिस्तर सामग्री बनाने में भी किया जाता है।
होटल श्रृंखलाओं के लिए यह अभ्यास न केवल पर्यावरणीय क्षति को कम करता है बल्कि कार्बन फुटप्रिंट को भी घटाता है। यह रीसाइक्लिंग मॉडल दिखाता है कि कैसे विलासवान सेवा प्रदाता टिकाऊ व्यावसायिक प्रथाओं को अपना सकते हैं।