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किराएदार के जाने के बाद मरम्मत का खर्च: कानूनी दायित्व और अधिकार

किराएदार द्वारा घर खाली करने के समय दीवारों, प्लास्टर या पेंट में क्षति होने पर मरम्मत की जिम्मेदारी को लेकर अक्सर विवाद उठता है। जानिए कि किन परिस्थितियों में मकान मालिक को सीधे व्यय करना पड़ता है और कब किराएदार की सुरक्षा जमा राशि से कटौती की जा सकती है।

LSN India · 5 November 2026

किराएदार के जाने के बाद मरम्मत का खर्च: कानूनी दायित्व और अधिकार

किराए के मकानों में क्षति की जिम्मेदारी लेकर मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होना आम बात है। भारतीय किराया नियंत्रण कानूनों के अनुसार, सामान्य टूट-फूट के लिए मकान मालिक को ही जिम्मेदारी लेनी होती है, क्योंकि भवन का रखरखाव उसका कानूनी दायित्व है।

हालांकि, अगर किराएदार की लापरवाही या गलत उपयोग के कारण दीवारों में छेद, बड़े दाग या गंभीर नुकसान हुआ हो, तो मकान मालिक सुरक्षा जमा राशि से इसकी कटौती कर सकता है। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि क्षति किराएदार की जानबूझकर की गई है, सामान्य घिसाई-पिटाई नहीं।

मकान खाली करते समय किराएदार को घर की वैध स्थिति में लौटाने की बाध्यता होती है। हल्के-फुल्के धब्बे, पेंट का हल्का उखड़ना या दीवारों पर पड़ी दरारें सामान्य क्षति मानी जाती हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा जमा राशि से कटौती नहीं की जा सकती।

विशेषज्ञों की सलाह है कि किराएदारी समझौते में मरम्मत संबंधी शर्तें स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। घर को खाली करते समय दोनों पक्षों को लिखित रूप में पूरी संपत्ति की सूची बनानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी विवाद से बचा जा सके।