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दशहरे पर रावण दहन की राख: परंपरा और लोक विश्वास का संगम

दशहरे के अवसर पर रावण दहन के बाद उसकी राख को घर लाने की परंपरा भारत के कई हिस्सों में प्रचलित है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस राख को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।

LSN India · 20 October 2026

दशहरे पर रावण दहन की राख: परंपरा और लोक विश्वास का संगम

भारतीय संस्कृति में दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी क्रम में रावण दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। रावण दहन के समय हजारों लोग इस अनुष्ठान में शामिल होते हैं, और इसके बाद कई लोग बची हुई राख को घर ले जाते हैं।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रावण दहन की राख से जुड़ी अनेक लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि इस राख को घर की चौखट, दरवाजे के ऊपर या पूजा स्थल पर रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता। कुछ परिवारों में इसे खेतों में भी बिखेरा जाता है, जिससे फसल की सुरक्षा रहे ऐसी मान्यता है।

धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो रावण को असुर माना जाता है, किंतु लोक परंपराओं में उसके दहन की राख को शुभ माना जाता है। विद्वानों के अनुसार, यह बुराई के नाश और सकारात्मक शक्तियों के आगमन का प्रतीक है। घर में इस राख को रखने से मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी सकारात्मक सोच को बल मिलता है।

हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार सीमित है, किंतु ये परंपराएं भारतीय समाज का अभिन्न अंग रही हैं। दशहरे का यह पर्व सामूहिक चेतना और साझा विश्वासों को मजबूत करता है। अनेक परिवारों के लिए रावण दहन की राख को घर में रखना न केवल एक धार्मिक कार्य है, बल्कि परंपरा और संस्कृति से जुड़ी भावनात्मक अभिव्यक्ति भी है।