World · India Bureau
करवा चौथ: चंद्र दर्शन में छन्नी का प्रयोग, जानिए धार्मिक महत्व
करवा चौथ का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है। परंपरागत विधि के अनुसार महिलाएं छन्नी के माध्यम से चंद्रमा को देखती हैं, न कि सीधी आंखों से।
LSN India ·

भारतीय संस्कृति में करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए परंपरागत महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और कुशलक्षेम की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। इस व्रत की परिपूर्णता के लिए चंद्रमा के दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं।
हिंदू धर्मशास्त्र में चंद्रमा को आयु, सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है। करवा चौथ की परंपरागत प्रथा के अनुसार महिलाएं सूप या छन्नी के माध्यम से चंद्रमा को देखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को सीधी आंखों से देखना या उसे अर्घ्य देते समय प्रत्यक्ष दृष्टि से देखना निषिद्ध माना जाता है।
पंडितों के अनुसार, छन्नी के सूक्ष्म छिद्रों के माध्यम से चंद्रमा को देखने की परंपरा चंद्रमा की किरणों से सुरक्षा प्रदान करती है। यह विधि आंखों की संरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्राचीन काल में विकसित की गई थी। इसी कारण पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी कड़ाई से पालन किया जाता है।