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दिवाली पूजन में गणेश के आगे सरसों का तेल क्यों जलता है

इस वर्ष 8 नवंबर को मनाई जाने वाली दिवाली पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है। गणेश की पूजा में सरसों के तेल के दीपक का विशेष महत्व माना जाता है।

LSN India · 3 November 2026

दिवाली पूजन में गणेश के आगे सरसों का तेल क्यों जलता है

दिवाली का पर्व भारतीय संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस दिन घरों में धन और समृद्धि के देवता माता लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा की जाती है। दोनों देवताओं की संयुक्त पूजा का यह परंपरागत रीति-रिवाज सदियों पुरानी परंपरा है।

गणेश की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना एक विशेष प्रथा है। माना जाता है कि सरसों का तेल शुद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इस तेल से जलाए गए दीपक को गणेश जी के आशीर्वाद का माध्यम माना जाता है। परंपरा के अनुसार यह दीपक घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का आह्वान करता है।

दिवाली की पूजा में खील का भोग भी गणेश को अर्पित किया जाता है। भक्तों का विश्वास है कि गणेश की सही ढंग से पूजा करने से कार्य में बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है। इसीलिए घरों में दिवाली के दिन सभी पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सरसों के तेल का दीपक जलाने से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं, बल्कि यह परिवार की रक्षा और समृद्धि में भी वृद्धि करता है। दिवाली की पूजा के समय इन परंपराओं का निर्वाह करना परिवार के लिए शुभ माना जाता है।