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ट्रेन पास करते समय विक्रेता जमीन पर क्यों बैठ जाते हैं
तेज गति से चलती ट्रेन के पास खड़े होने पर महसूस होता है कि हवा शरीर को अपनी ओर खींच रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भौतिकी का एक महत्वपूर्ण नियम है जिसे समझना सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
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चलती ट्रेन के आसपास हवा का दबाव और गति में तेजी से परिवर्तन होता है, जो खड़े व्यक्तियों को सीधे प्रभावित करता है। जब दो ट्रेनें एक-दूसरे के पास से गुजरती हैं, तो उनके बीच की हवा उच्च गति से प्रवाहित होती है। इस प्रक्रिया में दबाव में अचानक गिरावट आती है, जिससे व्यक्ति को ट्रेन की ओर खिंचने का एहसास होता है।
यह घटना बर्नुली के सिद्धांत के अनुसार होती है, जिसके अनुसार तरल या गैस की गति जितनी अधिक होती है, उसका दबाव उतना ही कम होता है। ट्रेन के चारों ओर की तेज हवा कम दबाव वाली क्षेत्र बनाती है, जबकि आस-पास की स्थिर हवा सामान्य दबाव बनाए रखती है। यह दबाव का अंतर व्यक्तियों को ट्रेन की ओर खींचता है।
रेलवे स्टेशनों पर खड़े विक्रेता और यात्री इसी कारण से जमीन पर बैठ जाते हैं। बैठी हुई स्थिति में शरीर का केंद्र गुरुत्व कम ऊंचाई पर रहता है, जिससे हवा के दबाव का प्रभाव कम होता है। यह सावधानी उन्हें ट्रेन से टकराने या गिरने से बचाती है।
रेल प्राधिकरण और सुरक्षा विशेषज्ञ आम जनता को चलती ट्रेनों के पास खड़े होने से दूर रहने का सुझाव देते हैं। ट्रेन से कम से कम छह फीट की दूरी बनाए रखना सुरक्षित माना जाता है। यह सुरक्षा दूरी हवा के दबाव और खिंचाव के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक है।