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अपने ही गानों के बोल भूल जाते हैं गायक, शंकर महादेवन ने दिया विवरण
प्रसिद्ध संगीतकार शंकर महादेवन ने समझाया है कि गायक कभी-कभी अपने रिकॉर्ड किए गए और परिचित गानों के बोल क्यों भूल जाते हैं। यह एक सामान्य घटना है जिसे वह अपने पेशेवर अनुभव से समझाते हैं।
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संगीत उद्योग में दशकों के अनुभव के साथ, शंकर महादेवन ने एक रोचक पहलू पर प्रकाश डाला है जो अक्सर संगीत प्रेमियों के लिए विस्मय का कारण बनता है। गायकों द्वारा अपने ही गानों के बोल भूल जाना वास्तव में एक सामान्य पेशेवर अनुभव है।
महादेवन के अनुसार, जब कोई गायक किसी गीत को बार-बार गाता है, तो उसका ध्यान मुख्य रूप से संगीत की धुन, लय और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर केंद्रित रहता है। समय के साथ, विशेषकर जब लाइव परिस्थितियों में भीड़ के साथ बातचीत करते हुए प्रदर्शन किया जाता है, तो मस्तिष्क स्वचालित रूप से गीत को गा सकता है और यह स्मृति के किसी अलग हिस्से में संग्रहीत हो जाता है।
मानसिक ध्यान की इस विभाजन को अक्सर "स्वचालित प्रक्रिया" कहा जाता है। जब कलाकार भीड़ के साथ जुड़ाव, अन्य कलाकारों के साथ तालमेल बिठाने या तकनीकी कारणों के कारण विचलित होते हैं, तो शब्दों की सटीक स्मृति में बाधा आ सकती है। यह एक शारीरिक प्रतिक्रिया है न कि संगीतकार की तैयारी की कमी।
महादेवन ने जोर दिया कि यह घटना केवल गायकों तक सीमित नहीं है। अभिनेता, वक्ता और अन्य प्रदर्शनकारी भी समान परिस्थितियों में स्क्रिप्ट या सामग्री भूल सकते हैं। यह मानव मस्तिष्क की एक स्वाभाविक विशेषता है कि वह एक बार सीखी गई चीजों को स्वचालित तरीके से संभालता है।