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दिवाली में मिट्टी के दीये जलाने से पहले पानी में भिगोने की परंपरा

मिट्टी के दीयों को पानी में भिगोना दिवाली की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। यह प्रथा न केवल सांस्कृतिक महत्व रखती है बल्कि इसके व्यावहारिक फायदे भी हैं।

LSN India · 7 November 2026

दिवाली में मिट्टी के दीये जलाने से पहले पानी में भिगोने की परंपरा

दिवाली के अवसर पर मिट्टी के दीये घरों में रोशनी लाते हैं। इन दीयों को प्रज्ज्वलित करने से पहले उन्हें जल में भिगोना एक प्राचीन और सुस्थापित परंपरा है। इस प्रथा के पीछे वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण निहित हैं।

मिट्टी के दीयों को पानी में भिगोने का मुख्य उद्देश्य उनकी संरचना को मजबूत करना है। जब मिट्टी पानी सोखती है, तो वह अधिक लचीली हो जाती है और दीये को जलाने के दौरान टूटने का खतरा कम हो जाता है। सामान्यतः दीयों को 15 से 30 मिनट तक पानी में रखना सर्वोत्तम माना जाता है। इससे मिट्टी पर्याप्त नमी सोख लेती है लेकिन अत्यधिक भीगी नहीं रहती।

पानी में भिगोए गए दीये अधिक समय तक जलते हैं और तेल की खपत को नियंत्रित करते हैं। नम मिट्टी धीरे-धीरे तेल को अवशोषित करती है, जिससे दीये लंबे समय तक निरंतर प्रकाश देते हैं। इस तरह तेल की बर्बादी में उल्लेखनीय कमी आती है।

दीयों की चमक और स्थायित्व बढ़ाने के लिए कुछ अतिरिक्त सावधानियां भी रखी जा सकती हैं। दीये को जलाने से पहले किसी कपड़े से हल्के हाथों से पोंछ लेना चाहिए। तेल भरते समय बहुत अधिक न भरकर सीमित मात्रा रखें। बत्ती को भी समान मोटाई की रखें ताकि दीया समान गति से जले।