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रेगिस्तान को नखलिस्तान में बदलने में जंगली गधों की महत्वपूर्ण भूमिका
इस्राइल के रामोन क्रेटर में 1982 में छोड़े गए 28 जंगली गधों ने 44 साल में पूरे इलाके का पारिस्थितिकी तंत्र बदल दिया। ये जानवर जल स्रोत बनाने और वनस्पति वृद्धि में महत्वपूर्ण साबित हुए।
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इस्राइल के रामोन क्रेटर क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से 1982 में 28 जंगली गधों को यहां छोड़ा गया था। चार दशक बाद आज ये जानवर इस सूखे मरुस्थलीय इलाके को एक हरा-भरा नखलिस्तान में तब्दील कर गए हैं।
इन लचीले जानवरों ने अपनी प्राकृतिक गतिविधियों के माध्यम से रेगिस्तानी जीवन के लिए आवश्यक जलस्रोत बनाए। उनके खुरों से बने गड्ढे पानी को रोककर रखते हैं, जो स्थानीय वन्यजीवन के लिए जीवनदायी साबित हुए हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया इस कठोर परिवेश में पानी के संरक्षण का एक अद्वितीय तरीका साबित हुई है।
गधों की भूमिका केवल जल निकायों तक सीमित नहीं रही। उनके मल-मूत्र के जरिए बबूल के बीज फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान मिला, जिससे पेड़ों की वृद्धि में तेजी आई। इस प्रकार, ये जानवर स्वाभाविक रूप से वन-रोपण का कार्य कर रहे हैं।
इस सफल परियोजना ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। रामोन क्रेटर में इस पारिस्थितिकीय रूपांतरण ने प्राकृतिक संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो दर्शाता है कि कैसे सही प्रजातियों की पुनर्स्थापना से बंजर भूमि को पुनः जीवंत किया जा सकता है।