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अमेरिकी महिला को घर पर मालिकाना हक बरकरार, पूर्व साथी के भाई की याचिका खारिज
इंडियाना कोर्ट ऑफ अपील्स के फैसले में गीना बेहनी ने अपने घर पर मालिकाना हक बनाए रखा है। बीस पांच साल पहले दादा-दादी की आर्थिक मदद से खरीदे गए इस घर पर उनके विस्तृत निवेश को अदालत ने मान्यता दी।
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इंडियाना राज्य में एक ऐतिहासिक कानूनी फैसले में गीना बेहनी ने अपने घर पर स्वामित्व को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। यह विवाद उनके पूर्व साथी के भाई टेरी करेला के साथ था, जिसने संपत्ति की बिक्री की मांग की थी।
बेहनी ने वर्ष 1999 में अपने दादा-दादी से प्राप्त दस हजार डॉलर की आर्थिक सहायता से यह घर खरीदा था। पिछले पच्चीस वर्षों में उन्होंने इस संपत्ति में महत्वपूर्ण निवेश किए हैं, जिसमें मरम्मत, रखरखाव और अन्य सुधार शामिल हैं।
इंडियाना कोर्ट ऑफ अपील्स ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए माना कि बेहनी का आर्थिक योगदान करेला की तुलना में बेहद अधिक था। करेला की संपत्ति में भूमिका न्यूनतम पाई गई। अदालत ने करेला को बेहनी के द्वारा उठाए गए नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया है।
यह फैसला सामान्य कानूनी सिद्धांतों पर आधारित है जो व्यक्तिगत संपत्ति में किसी भी व्यक्ति के वास्तविक वित्तीय योगदान को मान्यता देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है।