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मुद्रा खातों में महिलाओं की 67% हिस्सेदारी, मिला मात्र 43% कर्ज
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि हालांकि महिलाएं प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 37.07 करोड़ खातों में से दो-तिहाई हिस्सेदारी रखती हैं, लेकिन उन्हें कुल कर्ज वितरण का केवल 43 प्रतिशत ही मिला है। महिला उधारकर्ताओं को दिए गए औसत ऋण की राशि अन्य वर्गों की तुलना में काफी कम है।
LSN India ·

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत महिला उद्यमियों को दी जा रही सहायता में एक बड़ी विसंगति देखने को मिल रही है। सरकारी डेटा से स्पष्ट होता है कि योजना के कुल खातों में महिलाओं की संख्या अधिक है, लेकिन कुल कर्ज वितरण में उनका हिस्सा बेहद कम है।
योजना के अंतर्गत 370.7 मिलियन खातों में से महिलाएं बहुसंख्यक हैं, किंतु उन्हें कुल कर्ज राशि का केवल 43 प्रतिशत ही प्रदान किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि महिला उद्यमियों को दिए जाने वाले ऋण की औसत राशि अन्य उधारकर्ताओं की तुलना में काफी कम है।
इस स्थिति से लगता है कि हालांकि सूक्ष्म ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन का अवसर दिया जा रहा है, लेकिन उन्हें मिलने वाले ऋण की राशि उनके व्यावसायिक विस्तार के लिए अपर्याप्त है। महिला-केंद्रित स्टार्टअप और छोटे उद्यमों के विकास के लिए इस अंतराल को पाटना आवश्यक है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस असमानता के पीछे विभिन्न कारण हो सकते हैं, जिनमें महिलाओं द्वारा मांगे गए ऋण की कम राशि, संपार्श्विक संबंधी चिंताएं और बैंकिंग प्रक्रियाओं में भेदभाव शामिल हो सकते हैं। आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महिला उद्यमियों को पर्याप्त पूंजी सुलभ कराना समय की आवश्यकता है।