World · India Bureau
महिलाएं भावनात्मक बुद्धिमत्ता में आगे, लेकिन समाज में समस्या क्यों?
76 देशों में तीन दशक के शोध से पता चला कि महिलाएं औसतन भावनात्मक बुद्धिमत्ता में पुरुषों से बेहतर हैं, खासकर दूसरों की भावनाओं को समझने और प्रबंधित करने में।
LSN India ·
वैश्विक शोध में एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है जो भावनात्मक बुद्धिमत्ता को लेकर लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को चुनौती देती है। तीन दशक से अधिक समय के अध्ययन में 76 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि महिलाएं भावनात्मक बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में पुरुषों की तुलना में ज्यादा कुशल साबित होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की यह श्रेष्ठता विशेष रूप से दो महत्वपूर्ण कौशल में दिखाई देती है - दूसरों की भावनाओं को पहचानना और उन्हें प्रभावी तरीके से प्रबंधित करना। ये कौशल आधुनिक कार्यस्थलों में और सामाजिक संबंधों में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
हालांकि, इस शोध ने एक प्रश्न भी उठाया है कि यदि महिलाएं भावनात्मक बुद्धिमत्ता में अधिक सक्षम हैं, तो नेतृत्व और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में उनका प्रतिनिधित्व काफी कम क्यों है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सांस्कृतिक और संरचनात्मक समस्या है, न कि योग्यता की।
भारत समेत कई देशों में कार्यस्थलों पर लैंगिक असमानता बनी हुई है। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता को पहचानना और उसका सही उपयोग करना संगठनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। महिलाओं की इन क्षमताओं का सही तरीके से लाभ उठाने से कार्य प्रदर्शन और संगठनात्मक वातावरण दोनों में सुधार हो सकता है।