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एशियन गेम्स 2026: पहलवान निशा ने असफलताओं को पीछे छोड़ा, पदक के लिए दृढ़
बार-बार की चोटों और निराशाजनक परिणामों का सामना करने वाली पहलवान निशा दहिया का मानसिक रुख बदल गया है। वे अब अपनी क्षमता को एशियन गेम्स के 68 किग्रा वर्ग में एक प्रमुख पदक में तब्दील करने के लिए तैयार हैं।
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वर्षों तक, हर चोट के बाद पहलवान निशा दहिया के मन में एक सवाल उठता था - ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है? जब सब कुछ सही दिशा में जा रहा था, तभी शरीर क्यों टूट जाता था? लेकिन अब वह इस तरह के सवाल नहीं पूछतीं। उनके मानसिक दृष्टिकोण में यह बदलाव उनके खेल के भविष्य के लिए किसी भी तकनीकी सुधार जितना ही महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
दहिया ने अपने करियर में आई बार-बार की बाधाओं को सहज ढंग से स्वीकार करना सीख लिया है। वह अपनी चोटों के बारे में शिकायत करना बंद कर चुकी हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने स्वीकार किया है कि एक खिलाड़ी मेहनत पर तो नियंत्रण रख सकता है, लेकिन हमेशा परिणाम पर नहीं।
"मुझे लगता था कि भगवान मेरे साथ अन्याय कर रहे हैं। मैं सोचती थी कि ऐसा मेरे साथ बार-बार क्यों हो रहा है? लेकिन अब मैं ऐसा नहीं सोचती," दहिया ने कहा। वह अपनी किस्मत में जो लिखा है वह पाने के लिए कठोर परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एशियन गेम्स 2026 में निशा दहिया की महान क्षमता को एक प्रमुख पदक में परिणत करने की प्रत्याशा है। उनका यह नया दृष्टिकोण और मजबूत आत्मविश्वास उन्हें इस लक्ष्य को हासिल करने के करीब ला सकता है।