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यश और गीतु मोहनदास की फिल्म 'टॉक्सिक' में महत्वाकांक्षा अधूरी रह जाती है

बड़े बजट, प्रसिद्ध अभिनेता और दृश्यात्मक भव्यता के साथ बनी फिल्म 'टॉक्सिक' सिनेमाई महत्वाकांक्षा का दावा करती है, लेकिन क्या केवल महत्वाकांक्षा ही एक महान फिल्म बनाने के लिए काफी है।

LSN India · 27 August 2026

यश और गीतु मोहनदास की फिल्म 'टॉक्सिक' में महत्वाकांक्षा अधूरी रह जाती है

कन्नड़ सिनेमा में अपनी दमदार उपस्थिति के लिए जाने जाने वाले अभिनेता यश और प्रतिष्ठित फिल्ममेकर गीतु मोहनदास की सहयोगिता से बनी फिल्म 'टॉक्सिक' को लेकर बड़ी अपेक्षाएं थीं। फिल्म में सिनेमाटिक पैमाने, मशहूर कलाकार, आकर्षक विजुअल स्टाइल और कुछ नए की पेशकश का वादा था। हालांकि, इन सभी तत्वों के बावजूद फिल्म अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने में विफल रहती है।

फिल्म निर्माण में विशाल बजट और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन स्पष्ट दिखाई देता है। दृश्यात्मक भव्यता और प्रोडक्शन वैल्यू फिल्म की एक मजबूत पहलू है। अभिनेता यश और गीतु मोहनदास की टीम के प्रयास सराहनीय हैं।

फिर भी, महत्वाकांक्षा अकेली एक बड़ी और सफल फिल्म बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। कहानी के स्तर पर और संवेदनात्मक जुड़ाव में फिल्म को कमी महसूस होती है। दर्शक इस फिल्म को सिर्फ तकनीकी भव्यता से अधिक कुछ की उम्मीद करते थे।

'टॉक्सिक' का मामला हिंदी-भाषी सिनेमा में भी देखे गए एक सामान्य पैटर्न को दर्शाता है, जहां बड़े बजट और बड़े नाम कभी-कभी मजबूत कहानी कहने को गौण कर देते हैं। फिल्म का यह प्रयोग दर्शकों के साथ गहरे स्तर पर जुड़ने में असफल रहा है।