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यमन के हौथी विद्रोहियों को वर्षों का युद्ध मजबूत बनाता रहा
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन और इजराइल के हवाई हमलों के बावजूद यमन के हौथी विद्रोहियों की ताकत बढ़ती रही है। अब वे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों और सऊदी तेल सुविधाओं पर नियंत्रण के करीब पहुंच गए हैं।
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पिछले दशक भर में यमन के हौथी विद्रोहियों के खिलाफ कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने व्यापक सैन्य कार्रवाई की है, लेकिन इसके बजाय इन विद्रोहियों की ताकत निरंतर बढ़ी है। ईरान समर्थक हौथी अब प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर अग्रसर हो रहे हैं और सऊदी तेल सुविधाओं पर हमले करके वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार हौथियों की सफलता के मुख्य कारण उनकी भौगोलिक स्थिति और संगठनात्मक क्षमता हैं। वे यमन के विस्तृत पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी सैन्य ताकत को बिखेर सकते हैं, जिससे उन्हें एकीकृत हमले से बचाव मिलता है। साथ ही, वे महत्वपूर्ण तेल बुनियादी ढांचे और वैश्विक व्यापार मार्गों को धमकाने की क्षमता रखते हैं।
ईरान और इसके लेबनान तथा इराक के सहयोगी हौथियों को विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराते हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार यह बाहरी सहायता हौथियों की सैन्य क्षमता को लगातार बढ़ाए जा रही है।
हौथियों की सफलता का एक महत्वपूर्ण कारण उनकी कट्टरपंथी विचारधारा भी है, जो उन्हें अत्यधिक प्रेरित और अनुशासित रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विचारधारात्मक दृढ़ता उन्हें ईरान के अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों से अलग और अधिक प्रभावी बनाती है।