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12 साल की भारतीय-अमेरिकी बालिका ने 8000 से अधिक किताबें बांटी
न्यू जर्सी की सोफिया परेख ने अपने 'बुक स्टैंड' प्रोजेक्ट के माध्यम से हजारों बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराई हैं। सामाजिक कार्य के इस योगदान के लिए उन्हें ग्लोरिया बैरन पुरस्कार के लिए चुना गया है।
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वेस्टफील्ड, न्यू जर्सी में रहने वाली 12 वर्षीय सोफिया परेख ने शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय पहल की है। उन्होंने अब तक संयुक्त राज्य अमेरिका भर में 8,000 से अधिक किताबें बच्चों को मुफ्त में वितरित की हैं।
सोफिया ने कोविड-19 महामारी के दौरान मात्र सात साल की उम्र में 'सोफिया्स बुक स्टैंड' नामक एक परियोजना शुरू की थी। इस परियोजना के तहत वह प्रत्येक बालक-बालिका की आयु और रुचियों के अनुसार किताबें चुनती हैं। उनका उद्देश्य सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराना है।
सोफिया की सामाजिक सेवा केवल किताबें वितरित करने तक सीमित नहीं है। वह ऐसे स्कूलों में शिक्षकों को भी सहायता प्रदान करती हैं जहां शैक्षणिक संसाधनों की कमी होती है। इस तरह की पहल से वंचित क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
उनके इस सराहनीय कार्य को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृति मिली है। सोफिया को 2026 के ग्लोरिया बैरन यंग हीरोज पुरस्कार के लिए उपविजेता के रूप में नामांकित किया गया है। यह सम्मान युवा व्यक्तियों द्वारा किए गए असाधारण सामाजिक कार्यों को मान्यता देता है।