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विदेश के शोध से लौट रहे भारतीय विद्वान, IIT-IIM को दे रहे प्राथमिकता
भारत के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में विदेशों से पीएचडी और शोध पूरी कर लौटे युवा प्रोफेसरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय अनुभव से लैस भारतीय शिक्षाविद अब देशीय संस्थानों में अपनी कैरियर बनाने को वरीयता दे रहे हैं।
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IIM बैंगलोर, IIM कोझिकोड और अन्य प्रमुख प्रबंधन विद्यापीठों में विदेशी विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट और शोध कार्य पूरी कर भारत लौटने वाले शिक्षकों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। ये युवा विद्वान अमेरिका, यूरोप और एशिया के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाने के बाद भारत में शैक्षणिक सेवा को अपना मार्ग चुन रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारण हैं। एक ओर भारत के शीर्ष संस्थान अनुसंधान में बेहतर सुविधाएं और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशों में नौकरी के बाजार में प्रतिकूलता और वीजा संबंधी चुनौतियां भी इस लौटौती को प्रभावित कर रही हैं।
इस बदलाव के पीछे राष्ट्रीय गौरव और भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की भावना भी देखी जा रही है। अपनी मातृभूमि में योगदान देने की इच्छा से प्रेरित ये शिक्षाविद, अंतरराष्ट्रीय मानों के साथ भारतीय संदर्भ में प्रबंधन शिक्षा को नया आयाम देने का प्रयास कर रहे हैं।
अकादमिक विशेषज्ञ इस प्रक्रिया को भारतीय उच्च शिक्षा के विकास के लिए सकारात्मक मानते हैं, क्योंकि ये विद्वान अंतरराष्ट्रीय शोध मानकों, नई शिक्षण विधियों और वैश्विक नेटवर्क को भारतीय परिसरों में स्थापित करने में भूमिका निभा रहे हैं।