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केले और प्लांटेन के स्टार्च से बनाई जा रही मजबूत बायोप्लास्टिक
अमेरिका के मोंटाना राज्य की एक सातवीं कक्षा की छात्रा ने पौधों के स्टार्च से टिकाऊ बायोप्लास्टिक विकसित किया है। उनके शोध में पाया गया कि प्लांटेन में केले की तुलना में अधिक स्टार्च और शक्ति होती है।
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मोंटाना की एक युवा विज्ञान प्रेमी छात्रा राई लिन रोस्ट ने केले और प्लांटेन के स्टार्च का उपयोग करके बायोप्लास्टिक बनाने का एक नया तरीका खोजा है। अपनी परियोजना के माध्यम से इस सातवीं कक्षा की छात्रा ने दोनों फलों से प्राप्त स्टार्च की तुलना करके एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाला है।
रोस्ट के अनुसंधान में पाया गया कि प्लांटेन में केले की तुलना में काफी अधिक स्टार्च की मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा, प्लांटेन से बनाई गई बायोप्लास्टिक में तन्य शक्ति (टेंसाइल स्ट्रेंथ) केले से बनी बायोप्लास्टिक से अधिक थी। यह खोज पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक विकल्पों को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस परियोजना में रोस्ट ने दोनों प्रकार की बायोप्लास्टिक की तुलना पारंपरिक प्लास्टिक पैराफिल्म से की। इसके माध्यम से उन्होंने विभिन्न प्रकार की सामग्रियों की शक्ति और स्थायित्व का आकलन किया। परीक्षण के परिणाम यह दर्शाते हैं कि पौधों पर आधारित स्टार्च से बनी बायोप्लास्टिक पर्यावरणीय परिस्थितियों में लंबे समय तक टिकी रह सकती है।
यह अनुसंधान टिकाऊ और बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक विकल्पों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रोस्ट की इस परियोजना का उद्देश्य ऐसी बायोप्लास्टिक बनाना है जो प्रकृति में आसानी से विघटित हो सके और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए।