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भारत लौटने का आह्वान करने वाले श्रीधर वेम्बु विवादास्पद बयानों को लेकर घिरे
जूम के संस्थापक श्रीधर वेम्बु के प्रवासी भारतीयों को लेकर विरोधाभासी बयानों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। वेम्बु का कहना है कि उन्होंने केवल भारत में अवसरों की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।
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जूम के भारतीय संस्थापक श्रीधर वेम्बु को विदेशों में बसे भारतीयों के प्रति अपने विरोधाभासी संदेशों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर तो वह प्रवासी भारतीयों को देश लौटने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने कहा है कि यदि कोई नहीं आएगा तो भारत को प्रार्थना करनी होगी।
वेम्बु के इन बयानों ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जहां कई लोगों ने उन्हें भ्रमित करने वाले संकेत भेजने का आरोप लगाया है। आलोचकों का मानना है कि ऐसे बयान प्रवासी भारतीयों को भ्रामक संदेश देते हैं और असमंजस पैदा करते हैं।
इस विवाद के जवाब में वेम्बु ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्होंने केवल भारत में मौजूद अवसरों की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि विकल्प क्या है - क्या हमें प्रवासी भारतीयों से यह विनती करनी चाहिए कि वे भारत में रहने की अनुमति दें?
इस मुद्दे ने भारत में प्रतिभा के पलायन और देश में वापसी की संभावनाओं पर एक बड़ी बहस को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और निजी क्षेत्र को प्रवासी भारतीयों को भारत लौटने के लिए ठोस अवसर और नीतिगत सहायता प्रदान करनी चाहिए।