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भारतीयों के साथ विदेशों में भेदभाव पर जोहो के वेम्बु का बयान
सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने कहा है कि नस्लभेद का मुद्दा भारतीयों को एक दर्पण दिखाता है। वेम्बु ने स्पष्ट किया कि वह उन लोगों के प्रति कोई नफरत नहीं रखते जो नस्लवादी विचारों से सहमति जताते हैं।
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भारतीय मूल के प्रौद्योगिकी उद्योग के शीर्ष नेताओं में से एक श्रीधर वेम्बु ने विदेशों में भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव के मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। वेम्बु के अनुसार, नस्लभेद की घटनाएं समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश हैं जो हमें अपनी वास्तविकता से रूबरू कराती हैं। उन्होंने इस मुद्दे को गंभीरता से देखते हुए कहा कि यह समस्या केवल भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक समस्या है।
वेम्बु ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ भारतीय नस्लवादी विचारों से सहमति दिखा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे लोगों के प्रति उनके मन में कोई नफरत नहीं है। यह रवैया उनके सामाजिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है।
जोहो के संस्थापक ने अपने बयान के माध्यम से यह संदेश दिया कि भेदभाव का मुकाबला करने के लिए समाज को अधिक जागरूक और संवेदनशील होने की आवश्यकता है। उनका दृष्टिकोण यह है कि नकारात्मक भावनाओं के बजाय, समझ और संवाद को बढ़ावा देना चाहिए। यह दृष्टिकोण भारतीय उद्योग जगत में एक अलग ही नैतिक मानदंड स्थापित करता है।